एक शाम, दो नाम
नाम
एक शाम,दो नाम
एक निश्छल,एक व्यापक
सफर एक किलोमीटर का
अपार खुशियां,अपार राहत
एक निश्छल,एक व्यापक
सफर एक किलोमीटर का
अपार खुशियां,अपार राहत
टांग खींचना,कभी चिढाना
मना करना या मनाना
बातों में कभी कभी
झलकती अश्लीलता
लेकिन इसके बिना भी
कहीं है क्या प्रसन्नता
मना करना या मनाना
बातों में कभी कभी
झलकती अश्लीलता
लेकिन इसके बिना भी
कहीं है क्या प्रसन्नता
एक मेरी बेदम उम्मीद को
दमदार हवा भरता
वहीं दूसरा सकारात्मक
अपमान है करता
दमदार हवा भरता
वहीं दूसरा सकारात्मक
अपमान है करता
सब अपनी भावनाओं को
ख़ुशी से बांटा करते
और सब समस्या का
हल निकाला करते
ख़ुशी से बांटा करते
और सब समस्या का
हल निकाला करते
सफर पूरा हुआ
लेकिन फिर भी आधा
चाय की फरमाइश बिना
पूरा नहीं,आधा
चाय की फरमाइश बिना
पूरा नहीं,आधा
एक दूसरे पर
बिल का बोझ लदाते
झगड़ा करते
हँसते मुस्कुराते
बिल का बोझ लदाते
झगड़ा करते
हँसते मुस्कुराते
अंततः किसी की जेब में
खनके चिल्लर
दो में तीन कटिंग
ख़ुशी से पीकर
खनके चिल्लर
दो में तीन कटिंग
ख़ुशी से पीकर
वापस एक किलोमीटर
एक निश्छल,एक व्यापक.....
एक निश्छल,एक व्यापक.....
✍️मो यूसुफ़ फारूकी
Comments
Post a Comment